जन्म दिया तुम्हें नाम दिया सु मानव पहचान दिया

नही कष्ट तनिक भर तुम्हें दिया भले हर्ष स्वयं का त्याग दिया

नही चाहिए मुझे धन और दौलत जो कुछ था सब तुमपे वार दिया

उस विपुल त्याग को कुछ समझो तुम मेरी जान से मत उलझो

बस इतनी सी दया करदो कहीं छोटी एक मचान देदो

मैं कुछ दिन का अब जाला हूं आगे नहि कुछ ताला हूं

बस चरण पादु से मत रौंदो मैं जल्दी जाने वाला हूं

खुश तुमको करने वाला हूं। ।

(- स्वयं नन्दन)