ठोकरों से ही संभला हूँ, गिरने के बाद

हर रास्तों से वाकिफ हूँ, चलने के बाद।


कोई क्या तोड़ सकेगा, बिखरने के बाद

हर पत्थर से वाकिफ हूँ, ठोकरों के बाद।


कोई रास्ता क्या रोकेगा मेरा,नया बनाने के बाद

हर तरीकों से वाकिफ हूँ,कई कोशिशों के बाद।


कोई क्या तकल्लुफ़ करेगा,किरदार जानने के बाद

हर तारीफों से वाकिफ हूँ, खुद को तराशने के बाद।


कोई क्या एहसास करायेगा, इनके जाने के बाद

हर एहसास से वाकिफ हूँ, उनके टूटने के बाद।


अब क्या कोई छोड़ जायेगा,सबके जाने के बाद

हर जरूरत से वाकिफ हूँ, पूरी होने के बाद।


घर मेरा क्या उजड़ेगा, तूफानों के गुजरने के बाद

हर तूफान से वाकिफ़ हूँ, उनको मोड़ने के बाद।


जीतना अब है क्या मुझे,सब हारने के बाद

हर खेल से वाकिफ हूँ, खेलने के बाद।


नये सितम क्या करेगी जिन्दगी, सब झेलने के बाद

हर घाव से वाकिफ हूँ, उनके भर जाने के बाद।


जिन्दगी अब क्या रंग दिखायेगी, बेरंग होने के बाद

इसके हर सवाल से वाकिफ़ हूँ, जबाब देने के बाद।