रणभूमि के युद्ध आ भागा नहीं हूं, बस थोड़ा थक गया हूं।
जानता हूं की वीर थकते नहीं हैं, पर मेरा भाग अभागा बन गया हैं।
मैं लोटूंगा बही अंदाज में , या तो महावीर बनूंगा या तो शूरवीर बनूंगा इस युद्ध में ।
हारा नहीं हूं, बस थोड़ा थक गया हूं।
मेरी पहचान यह नहीं हैं की मैं मनुष्य हूं, मेरी तो यह हैं की मैं वीर योद्धा हूं।
मैं इस युद्ध को जीतूंगा, यह मेरा अभिमान नहीं स्वाभिमान केह रहा हैं
