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”युवा”


युवा कहलाने का अधिकार

यह जगत उसी को देता है

जो शांति-शांति का राग नहीं

बस क्रांति-क्रांति ही जपता है


शील शक्ति का जिसमें समन्वय

जो इतिहास रचयिता है

जिसके भुजदंडों के बल पर

मान सुरक्षित रहता है

मान सुरक्षित रहता है

अभिमान सुरक्षित रहता है

अन्याय देखकर रक्त जहाँ

बन दावानल बहने लगता है

जो शांति-शांति का राग नहीं

बस क्रांति-क्रांति ही जपता है


नित उछाह से भरा हुआ 

जो तपा हुआ तो कुंदन सा

दम-दम करता हो ललाट 

जो महक रहा हो चन्दन सा

जिसका शौर्य प्रकाशित होकर

नभमंडल पूरित कर

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