कुछ अलग सा है आज के दिन में, जैसे
गुज़रते लम्हों का आगाज़ हो |
रोशनी बन तेरी बातें अंधेरे मन में छुपी,
मेरी शख्सियत को दिखाती हैं |
अबकी
सर्द रातों में तेरी यादे बेहद तड़पाती है |
कुछ अलग सा है आज के दिन में, जैसे
गुज़रते लम्हों का आगाज़ हो |
मेरी हथेलियाँ करीब ला कर वो बोल थे उनके,
कि ताउम्र साथ निभाएंगे |
सही कहा था
अब अकेले नहीं तेरी तस्वीर साथ लेकर बैठेंगे |
कुछ अलग सा है आज के दिन में, जैसे
गुज़रते लम्हों का आगाज़ हो |