*मेरी कलम*


ऐ कलम रुकना कभी ना

सच के लिए तुम लड़ना,

मुश्किलें आएं कितनी भी

डर कर कभी ना थमना,

हंसी खुशी, गम या उदासी

हर पल को तुम लिखना।


दिखलाना आईना समाज को

कुछ सपने भी तुम बुनना,

हमको देना शक्ति तुम

यथार्थ को जब हो लिखना।


तुझमें ताक़त है इंकलाब भी लाने की

तुझमें ताक़त है गलत से लड़ जाने की,

ऐ कलम दिलों में चिंगारी तुम

हिम्मत की जलाना

लिखते रहें ,रचते रहें निडरता निर्भयता से

डरें नहीं हम, झुकें नहीं हम

ताक़त, दौलत,सत्ता से।


 प्रेरणा।