है अगर दर्द तो दवा भी है
बे-वफ़ा, कोई बा-वफ़ा भी है
मत कहो हर किसी को ही वहशी
आदमी नेक और भला भी है
इश्क़ में हिज्र लाज़मी है पर
इश्क़ में वस्ल का मज़ा भी है
होशयारी से हर कदम रखना
इश्क़ की राह में दग़ा भी है
है इनायत ख़ुदा की ये लेकिन
ज़िंदगी एक हादिसा भी है
इक तरफ़ ज़िंदगी में हैं बस दर्द
इक तरफ़ दर्द में मज़ा भी है
क्या हुआ गर भटक गए हो "सफ़र"
लौट आने का रास्ता भी है
प्रेरित "सफ़र"
