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शुक्राना


हम हिसाब रखते हैं वक्त का,हम हिसाब रखते हैं पैसों का,हम हिसाब रखते हैं सामानों का,परहम हिसाब रखना भूल जाते हैंमोहब्बतों काऔर भूल जातें हैंशुक्राना अता करना ख़ुदा का,ख़ुदा के बंदों का.........।।Preeति

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