
ख़्वाहिशों का अजब सा शोर है
एक रूठता है,इक मानता है
इश्क में हर शख़्श,
अपना ज़ोर आजमाता हैं।।
दिल चीज ही ऐसी है
इक का टुटता है,
तो एक का जुड़ता हैं
कोई हँसता ही जाता है,
कोई रोता ही रहता है
इश्क है ये
इश्क में हर रंग आजाता है।।
छोड़ कोई जात
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