हुनर आगया है

ज़माने में जीने का मुझे

इसलिए-

हँस लेती हूँ मैं अब

सबके सामने

सुन लेती हूँ मैं लोगो को

 बिना कुछ बोले

क्योंकि उन्हें पसंद नहीं

 ख़िलाफ़ में कुछ बोला जाना

की उन्हें आदत हैं नुमाइशों की

कतरा से जाते हैं लोग सच से

की सायद सच उनके हिसाब से

 अलंकृत नही हो पाता

इसलिए कलंकित होजाता है

सबके हिसाब से...।।1

1nov18

preeति