सोने के पिंजड़े में 
क़ैद इक गुड़िया थी
तोड़ सकती नहीं थी
कि
जाने कितनी ही 
मजबूरियां थी ।
तोड़ लिए उसने, कि टूट गए
पर
एक एक करके सपने सारे
छूट गए
कह सकती नहीं थी
क्यूकी
कैदगाह के रखवाले
सारे अपने थे 
सोने के पिंजड़े में
"आजाद" इक गुड़िया थी।।
preeति