
याद नहीं कब आपने अँगुली पकड़ कर चलना सिखाया...
याद नहीं कब आपने काँधे पर बिठा कर मेला दिखाया...
याद नहीं कब आपने रुपए-पैसे का महत्व समझाया...
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