क्यूँ #ढलती_शाम के साथ
तेरी यादों की धुन छिड़ जाती है
जितना तुझे भूलना चाहूँ
उतना तू याद फिर आ जाती है
क्यूँ अंधेरों के बाद फिर
रौशनी की तरह जगमगाती है
क्यूँ संभलें हुए दिल की
धड़कनों को तेज़ कर जाती है
क्यूँ #ढलती_शाम के साथ
तेरी यादों की धुन छिड़ जाती है
✍️Preet Vohra


