क्युँ लाखों दिलों को उदास कर गए...
क्युँ हँसती-खेलती ज़िंदगी को राख कर गए...
क्युँ अपनी कामयाबी में भी ढूंढ न पाए खुशी...
क्युँ लगा तुम्हें कि अब करनी चाहिए खुद्खुशी...
हम तुम्हें आसमान में चमकते एक तारे की तरह नहीं
बल्कि आसमान की ऊंचाइयाँ छूते एक सितारे की तरह
देखना चाहते थे !!!
-Preet Vohra@sunounkahi


