क़भी सोचा ना था

दिन ऐसे भी आएँगे...


हम सब इस कदर

घर में बैठे रह जाएँगे...


मौसम होगा सुहाना

पर हम लुफ़्त उठा ना पाएँगे...


सालों कमाया पैसा

अब किस कदर उड़ाएँगे...


महँगे-महँगे बरतनों में

अब किसे खाना खिलाएँगे...


ब्रांडेद कपड़े, घड़ी व जूते

अब कहाँ पहन कर जाएँगे...


कभी सोचा ना था

दिन ऐसे भी आएँगे....


-Preet Vohra@Sunounkahi