क्या हुआ है?
मेरे दिल के आसमान पर अपने इश्क के खंजर से हमला किया है उसने और इसके चिथड़े कर दिए हैं, और अब चिथड़ों की सुराखों से सफ़ेद खून मेरी आंखों कि ओर बह रहा है और मेरी छोटी नाज़ुक पलकें इसे रोक नहीं पातीं
अब मेरी आंखों में गम के आंसू इश्क़ का खून दोनों हैं
अब मेरी आंखों में शाम का अकेलापन रात का सूनापन दोनों हैं

और तुम पूछते हो क्या हुआ है?
मत पूछा करो मुझसे