पूछो मत क्यों ना कहा मैंने, क्योंकि हर क्यों का जवाब नहीं होता? खुशबू तो हर फूल में होती है पर हर फूल गुलाब नहीं होता। तुमने बोतल ख़तम कर दी तो कुछ न हुआ, और मैंने एक जाम क्या पीया बवाल हो गया? तुम देर से घर रोज़ पहुँचते हो तो कुछ नहीं, मुझे एक दिन देर क्या हुई तो सवाल हो गया? तुम हँसते रहे ठहाके मार के तो कुछ नहीं, मैं मुस्कुरायी तो रज़ामंद हो गई? अगर मैंने ना कहा तो गलत है, और मैं शरमाई तो तुमको पसंद हो गयी? कैसे है तुम्हारी दोहरी सोच, और क्यों हैं यह तुच्छ विचार, आज़ाद हूँ मैं और आज़ादी से जीऊँगी, स्वीकार करलो मेरा आधार। दोहराना ना पड़े मुझे, एक बात तुम जान लो, शक्ति हूँ मैं, तुम मुझे पहचान लो। सब्र का मेरे इम्तेहान ना लो, क्योंकि मेरे सब्र का भी एक बांध होता है, मत भूलना अब से यह बात, की मेरी ना का मतलब ना होता है ।