झंडा हम देश का लहराते हैं, और साल दर साल स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं।

सवाल अहम यह है मगर, कि क्या हम सच में आज़ाद हैं? देश में सिर्फ़ आबादी है या फिर हम लोग सच में आबाद हैं?

एक तरफ़ हम बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ की मुहिम चलाते हैं, स्वच्छ हो भारत, यह आवाज़ उठाते हैं, और दूसरी तरफ़ आज़ादी के नारे लगाते हैं?

एक तरफ़ धर्म के नाम पर लहू बहाते हैं, अलग अलग प्रदेशों की माँग उठाते हैं, और दूसरी तरफ़ शहीदों की क़ुर्बानी की गाथा गाते हैं?

एक तरफ़ हम विदेशी लिबास और उनकी संस्कृति अपनाते हैं, मात्रभाषा का प्रयोग करने से कतराते हैं, और दूसरी तरफ़ मेक इन इंडिया का जशन मनाते हैं?

एक तरफ़ निर्भया का शोक मनाते हैं, दहेज के नाम पर बहू को आग लगाते हैं, और दूसरी तरफ़ नारी सशक्तिकरण की गुहार लगाते हैं?

वक़्त आ गया है की हम दिल से दिल मिलाएँ, मिल कर क़दम उठाएँ, संगठित होकर देश को आगे बढ़ाएँ, सोच को करें आज़ाद अपनी और सही मानों में स्वतंत्रता दिवस मनाएँ

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ         - प्रवीण आहूजा