
शिखर पर जमा हिम पिघलता नहीं है।
नदी रूप तब तक बदलता नहीं है।1
भले यत्न कितने करे रोज मानव।
बिना सूर्य के ताप मिलता नहीं है।2
पहाड़ों बिना कब नदी बन सकी है।
बिना पत्थरों जल उछलता नहीं है।3
दिये काट जंगल बिना कुछ विचारे।
क्ष
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