चलो छड़ते हैं नये से तराने।
सुनेंगे नये गीत इस के बहाने।1
जहां लिख सके हम नये गीत मिलकर।
हमें खोजने हैं वही सब ठिकाने।2
हमें ढालना है उन्हें काव्य में अब।
जो' बीते दिनों के थे' किस्से पुराने।3
सुरों में ढलेंगे जो सुर में नहीं थे।
निकालेंगे फिर से फ़साने पुराने।4
नहीं रोक सकते कलम को कभी हम।
इसी से उपजते गाने सुहाने।5
मज़ा तो तभी दोस्त मिलकर जो' बैठें
करें याद अपने पुराने ज़माने।6
कभी भूलना मत लिखी जो भी' कविता।
बनें आज फिर से इन्हीं के दिवाने।7