
व्यथा
सामाजिकता से अनभिग्य
कोमलता से अभिभूत
संयम से पूर्ण
धैर्य मन
क्यों विचारता नही ?
व्यथा
मूलता से अनभिग्य
प्रेम से अभिभूत
देवत्व से पूर्ण
कानूनी मन
क्यों सँवारता नही ?
व्यथा
धार्मिकता से अनभिग्य
सेवा से अभिभूत
सच्चाई से पूर्ण
सरकार
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