तुम्हारे बाद का मौसम बताता हूँ
शाम के माथे की सिकन दिखाता हूँ
सूरज ठहर गया था तेरे जाने पर
अब चाँद भी छत से कहा गुजरता है ।।
यू रात भर पढ़ा करता मैं आईना
उसमें भी तेरा चेहरा ही संवरता है
कल भोर में देखा हुँ तुझे सपनों में
जैसे तुम मुझे खिड़की पर बुलाती है ।।


