कैसे कह दूँ , अब तुमसे मैं

तुम हो हर गीत की साज प्रिय


कैसे कह दूँ ,अब तुमसे मैं

तुम अंधकार की दीपक हो


तुमको ही सोच कर मैं

कितनी मंज़िल यूँ पाई हैं


तुमरे संग बातें कर के

यूँ ही कितनी गीत बनाई हैं


तुम शब्द मेरी,तुम तान मेरी

इस तन्हाई की साथी हो


तुम तवानाई, तुम दानाई

तुम बिनाई की दीपक हो


तुम यकताई रानाई की

तुम चाँद की जैसी मुरत हो


कैसे कह दूँ , अब तुमसे मैं

तुम हो हर गीत की सजा प्रिय ।

#प्रवीणप्रणव


तवानाई(शक्ति),दानाई(अक्लमंदी)

बिनाई(आँखों की रोशनी)

यकताई(अद्वैत),रानाई(सौंदर्य)