भृमण करो ,सृजन करो
तेज है
सहेज लो
विश्व के कपाल पर
अपनी विजय को खीच दो
संयम भरा जो
रग में है
बुद्धि यही विकाश का
संसार में प्रकाश का
पथ हो अगर पथरीला
काटे भर शीशे भरा
न डरो तुम डरो
स्वयं बन के, वीर तुम
थाम लो बन सारथी
तू कृष्ण सा
एक अर्जुन को फिर ज्ञान दो
तुम वीर हो
न अधीर हो
यह यज्ञ तुम जो कर रहे
जीवन मे जो तुम सह रहे
सब मान है कल्याण का
जीवन मे न विश्राम का
चलते रहो बढ़ते रहो
संसार को तुम ज्ञान दो
तुम ज्ञान दो
भर्मण करो,सृजन करो
चलते रहो,बढ़ते रहो


