मेरी आंखों की वो नमी़ ना नजर आई तुम्हें,

तुमसे अब क्या कहूं......

मेरी मुस्कान तो दिखी पर मेरे माथे की वो सिकंज ना नजर आई तुम्हें,

तुमसे अब क्या कहूं.......

माना कि शोर बहुत है बाहर पर मेरी खामोशी ना नजर आई तुम्हें,

तुमसे अब क्या कहूं........


~ Praveen Dhakar