अगर तुम नाजायज को, जायज सिर्फ इसलिए ठहराते हो क्योंकि उसे तुम और तुमसे जुड़े लोग कर रहे हैं


तो मुझे तुमसे कुछ नहीं कहना...


- Praveen Dhakar