अपने आंखों में यह काजल रहने दो;
हमको अब यूं ही तुम घायल रहने दो !
बरस जाने से कहीं तमाम ना हो जाए;
बादल को अभी तुम बादल रहने दो !
हमको अब यूं ही तुम घायल रहने दो...
प्यार का नगमा ना बना सको मुझे तो;
मुख्तलिफ मुझे एक ग़ज़ल रहने दो !
हमको अब यूं ही तुम घायल रहने दो...
-प्रभंजन त्रिपाठी


