वक्त भी कभी-कभी बेवक्त आता है;
और वक्त पर यहां, कौन कमबख्त आता है !
वक्त को समझने में वक्त को जाया ना कर;
दो लम्हों के बीच भी कभी एक मुद्दत आता है !
वक्त भी कभी-कभी बेवक्त आता है...
मैं देवता बनकर भी नहीं जीत सकता दुनिया;
सिकंदर के हाथ में भी यहां शिकस्त आता है !
वक्त भी कभी-कभी बेवक्त आता है...
मैं अपने माजी को यूं ही पलटता रहता हूं;
के जो भूलाना चाहता हूं, याद बहुत आता है !
वक्त भी कभी-कभी बेवक्त आता है...
- प्रभंजन त्रिपाठी


