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आज दिल फ़िर बोल पड़ा

आज दिल फिर बोल पड़ा

अब तलक तो शान्त था 

सूना था एकांत था

अब तो है ज़िद पर अड़ा

आज दिल फ़िर बोल पड़ा।

भूल गया था इसे कहीं

इक रोज चलते फिरते यूँ ही

वहीं रस्ते में मिला खड़ा

आज दिल फ़िर बोल पड़ा।

ले गया था इसे कोई जो भी

ख़्वाहिश मन बहलाने की होगी

पर ये भी है खुद्दार बड़ा

आज दिल फ़िर बोल पड़ा

वो इसे नही भाया होगा

घर याद इसे फिर आया होगा

फिर घर को वापस निकल पड़ा

आज दिल फिर बोल पड़ा

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