तुम हो वो चिंगारी, जो रोशनी बिखराए,
प्रकृति की शक्ति, जो हर मुश्किल मिटाए।
हर तूफान में अडिग खड़ी रहो,
हौसलों से भरी, हर चुनौती को जीत लो।
जैसे नदी बहती है, अपना रास्ता बनाती,
रात-दिन चलकर, अपनी मंजिल पाती।
हर मोड़, हर घुमाव में,
तुम्हारी ताकत, हर कदम पर साथ है।
न कोई जंजीर, न कोई डर तुम्हें बाँध सके,
तुम हर बार उठोगी, और ज्यादा मजबूत बनके।
तुम आगे बढ़ो, तुम्हारे इरादों में दम है,
तुम बनी हो महानता के लिए, सदा के लिए।
उठो, मेरे दोस्त, अपनी ताकत को पहचानो,
जन्मे हो तुम रोशनी को छूने के लिए, मानो।
इस सफर को अपनाओ, इसका लुत्फ उठाओ—
नियति भी तेरे आगे सिर झुकाएगी,
जो कभी नामुमकिन थी, उसी डगर में राह बन जाएगी।
प्रतिभा

