दीपावाली
दीपों की ज्योति आई है,
अमावस में रौशनी जगमगाई है।
राम लौटे आज अयोध्या धाम,
दीप जलाकर फैलाया खुशियों का पैगाम।
सागर मथने पर लक्ष्मी जी को पाया,
धन-संपदा की देवी ने आशीर्वाद बरसाया।
विष्णु संग विवाह का वचन निभाया,
हर घर को समृद्धि का उपहार दिलाया।
लक्ष्मी माता संग गणपति आते,
हर द्वार पर सुख-संपत्ति का दीप जलाते।
कुबेर के साथ गणेश को बिठाया,
हर घर को धन-धान्य से सजाया।
दीप जलाकर हम पर्व मनाएं,
सतयुग-त्रेता की यादें फिर सजाएं।
माता लक्ष्मी, गणेश संग पधारें,
सुख-शांति का आशीष बरसाएं।
दीपों से ये अंधकार मिटाएं,
सच्चे सुख का मार्ग हमें दिखाएं।
फूलों की महक, बिखरे रंग-बिरंगे,
संगीत की धुन पर सब मिलकर नाचे।
बच्चों की हंसी और बड़ों की ममता,
से सजे हर घर का आँगन।
हर दीये की लौ में ये संकल्प जगाएं,
अपनी आत्मा में भी उजियारा लाएं।
चलो मिलकर हर घर में प्रेम का दीप जलाएं,
इस दीपावली हम सब मिलकर खुशियों का पर्व मनाएं।

