तन का तार छूने से पहले

मन को तू भिगो दें

प्रेम के रँगों में रंग के

गेरुआ तू मोहे कर दे !


फागुन बिखरा चारोँ ओर

हुई सुनहरी धरती

मैं पलाश का फूल हूँ

तू बन जा सुगंध मेरी !


तन का तार छूने से पहले

मन को तू भिगो दें

प्रेम की ठंडाई पिलाकर

दीवानी तू मोहे कर दे !


जंगल जंगल छाई लालिमा

फूलो सँग पलाश के

तू भी फागुन की मस्ती में

रंग दे मोहे रंग लाल से ।


सीमाएं सब तज कर

मिल जा प्रेम-परिहास से

देखें ना हों जो मंजर

उस मौसम से तू मिला दे !


प्रेम का रंग चढ़ा मुझ पर

अपनी तू मोहे कर ले

रात नूर हो दिन रंगीन

ऐसा फागुन तू मुझको दे दे।

~ प्रतिमा / @PratimaaWrites

#holi #festivepoetry