प्रेम की जो अभिव्यक्ति हो,

भाव - समर्पण सारे हों ।


ह्र्दय से जो कोई पूजे,

देवता खुश सारे हों ।


मैं - तुम चले किसी भी ओर,

मन में ना मैल हमारे हों।


प्रेम मिलन की बेला में ,

स्वपनों के उजियारे हों। 


~ प्रतिमा / @PratimaaWrites