प्रेम की अनुपम धारा में

बहना अच्छा था ।


मेरे लिए तुम्हारा हर,

प्रेम समर्पण अच्छा था।


अच्छी थीं वो सब बातें

जो तुमने कही थीं मुझसे।


पर तुम्हारा यूँ छोड़कर जाना..

बोलो क्या अच्छा था ?


प्रेम में रहकर प्रेम निभाना

बोलो क्या मुश्किल था ?


मैं तुम्हारी राधा बन जाती ,

बस तुमको कान्हा बनना था ।


© Pratimaa Srivastava