ह्रदय के अंतस में
चाह ...
कुछ और है..,
ज़िंदगी के संग्राम में
राह कुछ और है..!
फूल बन जाएं सब शूल,
चाह है ये ह्रदय में !!
फूल में बदल दे सब शूल,
मिले कोई ऐसा रहबर,
वक़्त रुक जाए अगर,
और ठहर जाए ये दहर,
तब भी ह्रदय के अंतस में,
कोई चाह रहेगी
अविरल-अविचल।
~ प्रतिमा / @PratimaaWrites


