जब भी तूलिका उठाती हूंएक ही तस्वीर बार बार उकेर जाती हूंदेख हतप्रभ रह जाती हूंवो एक चहेरा जिसे देखा था सिर्फ ख्वाब मेंकैसे उसे बखूबी कैनवास पर उतारती हूं।