वक़्त वक़्त की बात है...
कभी प्यार की बहार है,
कभी नफरत बेशुमार है।
कभी आंखों में नमी है ,
कभी होठों पे हंसी है ।
कभी अपने भी हुए पराए हैं ,
कभी पराए भी हुए अपने हैं ।
कभी बीच मझधार में फंसे हैं,
कभी किनारे पे आ खड़े हैं ।
वक्त वक्त की बात है...
कभी मुश्किलों के भंवर में पड़े हैं,
कभी सफलता के शिखर पर खड़े हैं।
वक्त वक्त की बात है...
आज जो हमसे बात- बात पे अड़े हैं
बीते कल में वहीं हमारे लिए लड़े हैं
सब वक्त वक्त की बात है...
कभी जीत है, तो कभी हार है ।
-प्रतिमा पांडेय


