तुम्हारी तरफ से
ये जो हवाएं आ रही है
तुम्हारा हर पैग़ाम हम तक पहुंचा रही है।
तुम समझते हो सब भूल गए हैं हम,
तुम्हारे ही खत्तों को अब भी समेट रहे हैं हम ।
न जाने कैसे हुआ तुम्हें ये वहम,
भूलना होता अगर आसान , तो क्यों होता तुम्हारे होठों पे अब तक हमारा नाम।
क्यों सुनाती ये हवाएं फिर हमें तुम्हारे संदेश तमाम,
उम्मीद करते हैं अब ना दोगे तुम्हें भूलने का हमें इल्जाम..।
Pratima Pandey


