शराफत है हमारी

की अब भी कुछ परवाह करते हैं तुम्हारी,

समझते नहीं हैं ना दुनियादारी।

कभी जो की थी तुमसे यारी,

क्या हुआ जो पड़ गई भारी,

याद रहेंगी कम से कम तुम्हे बातें हमारी,

था एक दोस्त और थी उसकी कभी दोस्ती प्यारी।।

Pratima Pandey