दिल किसी का जो दुखा रहे हो,
उसकी हर आह से निकली बद्दुआ कमा रहे हो।
सही है जो कोई अपने हक की जायज मांग करता है,
कमजोर है तो क्या ,जीने का वो अधिकार नहीं रखता है।
मांग उसकी कुछ लोगों को जाने क्यूं अखर जाती है
उसकी आवाज़ दाबने की हर कोशिश की जाती है।
अरे सामर्थ्यवानो कितना दबाओगे किसी कमजोर को,
जोर लगाकर भी ना तोड़ पाओगे उनके हौसले को।
उठते तूफान जब जब रोके जाते हैं,
तब तब सैलाब आते है।
उसमें बहने से खुद को तुम रोक नहीं पाओगे ,
बुरे कर्मों का बुरा होता है नतीजा शायद तब तुम समझ जाओगे।
अफसोस! तब चाहकर भी ना संभल पाओगे,
अपनी करनी पर बस पछताओगे ।
सही का क्या है,
सही के साथ तो खड़ा रहता है जमाना ,
गलत का नहीं चलता कोई बहाना ।
हमारी एकता को जो चाहो आजमाना,
इतिहास जाकर बस तुम दुहराना।
याद आ जाएगा हमने एकजुट होकर
कैसे था
उन अंग्रेजों को हमारे देश से निकाला।
By Pratima Pandey
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