आई है फागुन की बाहर ,

लेकर होली का त्योहार ।

चहुंओर उड़ रहे हैं अबीर और गुलाल ,

क्यों रखें किसी के लिए दिल में मलाल ,

चलो सब को रंग डालें एक ही रंग में आज।

मना ले उन्हें जो हैं सालों से नाराज,

उनके गालों पर मलकर थोड़ा गुलाल ।

गुझिया की मिठास से कराएं सबका मुंह मीठा,

कड़वाहट को ना मिले किसी के भी जीवन में हीठा ।

प्रेम के रंगों की हो हर तरफ बरसा ,

कोई मन ना रहे इसके लिए तरसा ।

इस रंगोत्सव सब जाएं खुशियों के रंगों से भीग ,

आप सभी को मुबारक हो होली का यह शुभ दिन ।

- प्रतिमा पांडेय