यह संसार मानो एक रंगमंच है

इस रंगमंच के हैं हम किरदार

कथानक लिखा है ईश्वर ने खुद

वही आलेखक 

वही निर्देशक हमारा है

हां ये दुनिया एक रंगमंच है

हम हैं इसके कलाकार

कभी हंसना है यहां

तो कभी रोना है

अभिनय करते करते ऐसा तो

सभी कलाकारों के साथ तय होना है

निभा अपनी भूमिका इस रंगमंच से चले जाना है

नये कलाकारों को फिर यहीं नाटक करने आना है

यूं ही लगा रहता अनवरत संसार के मंच पर

हमारा आना और जाना है 

किरदार यही रहने हैं मगर कलाकार बदल जाने हैं ।


- प्रतिमा पांडेय