प्रेम की देहरी को छूते ही ,
सारे दोष समाप्त हो जाते हैं ।
प्रेम गुणों का ख़ज़ाना है ।
अतः कोई भी अवगुण
इसके द्वार से अंदर
प्रवेश नहीं कर सकता ।
जहां प्रेम है वहां दोष
हर्गिज नहीं रह सकता ।
प्रेम का प्रकाश जहां जहां जाता है ,
वहां वहां अंधकार मिट जाता है ।
- प्रतिमा पांडेय


