नज़रें हैं नीची ,पलकें झुकी हैं

   लब सिल गए हैं, सांसे रुकी हैं

मोहब्बत ये उनकी अभी शुरू ही हुई है

प्रेम गीत दो दिलों की धड़कनें गा रही हैं 

बातें करने में अभी हिचकिचा दोनों रहे हैं

 प्रेम के ये दरअसल पंछी नए हैं

  नज़रें हैं नीची ,पलकें झुकी हैं

  लब सिल गए हैं,सांसें रुकी हैं 

नए प्यार की यही सदा से मुश्किल रही है

लब सिल गए हैं,सांसे रुकी हैं ।

- प्रतिमा पांडेय