कितने ही पतझड़ क्यों ना आएं

पेड़ नहीं मरा करते


उम्मीद की चादर ताने

वो करते हैं इंतजार

वक़्त के बदलने का


यकीन रखते हैं वो

की लौट आएंगी

उनकी सारी पत्तियां

प्यारी चिड़ियां डालेंगी

फिर उन पर अपना डेरा


जानते हैं वो की

रात के अंधेरे के बाद

सुबह का उजाला आता ही है

- प्रतिमा पांडेय