नाटक जारी है

दुनिया के रंगमंच पर

सबको दिखानी अपनी अदाकारी है

अलग अलग काया में आत्माएं निभा रही हैं अपना किरदार

किसी के पास है खुद का घर

तो कोई है यहां किरायदार

कोई गाड़ी से चल रहा है

कोई पैदल ही चल रहा है

कोई हंस रहा है

तो कोई रो रहा है

जैसे पेड़ लगाए जिसने

वैसे ही फल खाए उसने

देने वाले को यहां मिलता भी ज्यादा है

प्यार बांटने वाला प्यार ही पाता है

रख लो चाहे जितना भी धन

लेके यहां से कोई कुछ नहीं जा पाता है

हर कोई यहां अपना अपना किरदार निभाता है

किसका है सर्वोत्तम अभिनय ऊपर बैठा आलेखक ही बताता है ।

By PratimaPandey

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