कहानी कुछ और थी,हकीकत कुछ और...बनते थे जो बड़े सीधे ,उनके दिल में था चोर ।खौफ़नाक से चेहरे पर ,मासूमियत का था नक़ाब ।समझ नहीं पाता कोई उसे,जो नहीं करता कभी गौर ।
कहानी कुछ और थी,हकीकत कुछ और...
बनते थे जो बड़े सीधे ,उनके दिल में था चोर ।
खौफ़नाक से चेहरे पर ,मासूमियत का था नक़ाब ।
समझ नहीं पाता कोई उसे,जो नहीं करता कभी गौर ।