जब तुम्हें चांद ही नहीं पसंद ,
भला उसका दाग़ कैसे पसंद आएगा ।
सुनो ! मैं बिल्कुल चांद जैसी हूं ,
तुम्हें मेरा साथ रास नहीं आएगा ।
- प्रतिमा पांडेय


जब तुम्हें चांद ही नहीं पसंद ,
भला उसका दाग़ कैसे पसंद आएगा ।
सुनो ! मैं बिल्कुल चांद जैसी हूं ,
तुम्हें मेरा साथ रास नहीं आएगा ।
- प्रतिमा पांडेय