सूखी नदियों से अचानक बारिश के हो जाने की खुशी मत पूछो

मरुस्थल से अचानक दो फूलों के खिल जाने की खुशी मत पूछो

भटके हुए मुसाफिर से अचानक मंजिल के मिल जाने की खुशी मत पूछो

भंवर में अटकी नाव से अचानक उम्मीद की लहर के मिलने की खुशी मत पूछो 

मत पूछो, मत पूछो कि गम ही नहीं कभी-कभी

खुशियों को भी शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन होता है

सो मत पूछो 

- प्रतिमा पांडेय