देर से ही सही तू मिलेगी जरूर ।
मेरी अंधेरी रातों का ,तू ही तो है उम्मीद ए नूर,
मुझे तब भी था ,मुझे अब भी है खुद की मेहनत पर गुरूर।
सितम कितने भी वक़्त कर ले ,मुझे हारने को कर ना पाएगा मजबूर
तेरे मिलने तलक, चलती रहूंगी मैं जरूर ।
हर सजा मुझे है अभी मंजूर,
सुना है मेहनत का फल मीठा होता है बहुत।
मस्किलें मुझे अब ना रख पाएंगी तुझसे दूर,
मेरे हौसलें कहते हैं ,तुझसे मुलाकात से पहले
चाटनी पड़ती है ,सभी को धूर।
क्या हुआ ! जो गिर गई, उठ के झट से दौड़ूंगी जरूर,
तेरे मिलने तलक, चलती रहूंगी मैं जरूर ।
Pratima Pandey


